Bahubali:The Conclusion 

राजामौली जी का धन्यबाद करना चाहूंगा जो उन्होंने अपनी मूवी #BahubaliTheConclusion में भारत के गौरव शाली इतिहास को दिखाया , वरना पिछले 50 – 60 सालों से #Bollywood भारत के इतिहास को नीचा दिखाने की कोशिश में ही रहा है। विदेशो के Locations दिखाना विदेशी पौशाक को ही सही बताना और विदेशी दिनचर्या की ही वकालत करना यही काम चल रहा था। 

अपने गौरव शाली इतिहास का मजाक बनाना , जिन्होंने देश भक्ति फिल्मे बनाई उनका मजाक बनाना , माननीय मनोज कुमार जी का मजाक बनाया गया , मोहम्मद रफी जी का मजाक बनाया गया। अभी हाल ही में जब अक्षय कुमार को राष्ट्रीय पुरष्कार से सम्मानित किया गया , तब कई बॉलीवुड हस्तियों के पेट का पानी हिल गया।
बॉलीवुड में बहुत से लोग वामपंथ की विचारधारा से जुड़े हुए है , वे कभी नही चाहते कि भारत का गौरवमयी इतिहास किसी को बताया जाए , वे इस इतिहास का तिरस्कार करते है और हमारे देवी देवता का उपहास उड़ाते है।

क्षत्रिय समाज को इन्होंने बलात्कारी , डाकू इसी रूप में पेश करने की कोशिश की हमेशा। जिस क्षत्रिय समाज ने देश की अखंडता कायम रखने के लिए इसे अपने बलिदानो से सींचा था उन्हें इन्होंने सिर्फ बलात्कारी बनाके पेश किया। पर ये कुत्ते लोग है आज ये भारतीय सिपाही को भी बलात्कारी कह रहे है जो सिमा पे सिर्फ इसलिए लड़ रहा है क्योंकि हम सुरक्षित रहे। जब इन्होंने जो वर्तमान मे इनकी रक्षा कर रहा है उसकी ही इज़्ज़त नही की तो ये जो भूतकाल में इनकी रक्षा करके इनको यहां तक लाये उनकी इज़्ज़त क्या करेंगे।

वामपंथी

आज नेट पे कुछ वामपंथी विचारधारा पे लेख पढ़ रहा था , जानने को मिला ये सब नास्तिक होते है और किसी धर्म को नही मानते , कट्टरवादी विचारधारा के खिलाफ इन्होने कई आन्दोलन किये और गणतंत्र का समाजवाद का नारा दिया. इनके प्रवक्ता मार्क्स ने कहा था ‘ धर्म लोगो के लिए अफीम के सामान हे ‘.

ये लोग अपने को कट्टरवादी विचारधारा के खिलाफ बोलते है , पर ये लोग खुद कट्टरवाद अपनाते है आप इनके सामने वामपंथ के खिलाफ कुछ नही कह सकते.

अब इनकी कुछ सच्चाई उजागर करते है , इनका भी एक धर्म है , और इनके प्रमुख धार्मिक गुरु या भगवान् कह लो वो है मार्क्स , एंगल्स , और लेनिन. इनके धार्मिक स्थल है मास्को और क्रेमलिन , और इनकी धार्मिक किताब है दस कैपिटल्स (स्वार्थ २०१३ की एक पोस्ट से). ये किताब को १०० साल से ज्यादा हो गए है पर अभी तक इसमें कोई परिवर्तन नही किया गया है , १०० साल में दुनिया कहा से कहा चली गयी पर ये अभी तक यही अटके हुए है.

नक्सलवाद जो आज एक बीमारी बन गया है हिंदुस्तान के लिए वो इन्ही की देन है , ये कहते है नक्सली लोग गरीब है ,अशिक्षित है , ये आदिवासी है , इनका बाहरी दुनिया से संपर्क कटा रहता है , इनका सोसन होता रहता है, इनकी बहुत सी समस्याएँ है इसलिए इन्होने हथियार उठा लिए है. सरकार ने इनका सही से विकास नही किया.

अगर ये गरीब है तो इनके पास विदेशी हथियार खरीदने के पैसे कहा से आते है , अगर ये अशिक्षित है और बाहरी दुनिया से अनजान है तो माओ वाद और मार्क्सवाद का ज्ञान कहा से आया इनके पास , इन्हें सपना आया था क्या. जो लोग इन्हें हथियार देते है मार्क्सवाद का ज्ञान देते है वे लोग इन्हें शिक्षा भी दे सकते थे और इनकी गरीबी भी दूर कर सकते थे. पर उन्हें अपना धर्म का विस्तार करना था और इन सीधे सादे आदिवासियों के अलावा उन्हें और कौन मिलेगा धर्म का विस्तार करने को.

हिन्दू धर्म को ये अपना सबसे बड़ा शत्रु मानते है , क्यूंकि इस धर्म के सामने इनकी विचारधारा फिक्की पड़ जाती है, ये धर्म स्वयं अपनी कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करने की ताकत रखता है. कट्टरपंथ इसमें जन्मा था फिर शांत भी हुआ और तरक्की की रहो पर ये देश को लेके भी गया. इसी धर्म के एक वैज्ञानिक ने धरती पे बेठे बेठे चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का रहस्य बताया था , और इसी ने पृथ्वी और सूर्य के बिच की दूरी भी नापी थी. कुछ कमियाँ रही जो धीरे धीरे दूर होती जा रही है , और जो बाकि रह गयी है वे भी जल्दी ही दूर हो जाएँगी.

इस वामपंथी विचारधारा को हराना है तो समाज को शिक्षित करना होगा , गरीबी दूर करनी होगी, द्वेषभाव हटाने होंगे, जातिवाद ख़तम करना होगा , ये सब इनकी उपज है और ये कभी नही चाहेंगे की ये ख़तम हो , इसलिए हमे इन्हें ख़तम करना होगा वामपंथ अपने आप ख़तम हो जायेगा.