बचपन और दंगे

२७ फ़रवरी बुधवार का दिन था, आखिर के दो घंटे स्कूल के बच्चों को खेल के मिले थे, मैदान में वो जमकर फुटबॉल खेल रहे थे, आने वाले कल की बात से अनजान. अब्दुल ने अमन को चिल्लाते हुए कहा – ढंग से पास किया कर तेरी बॉल आधे तक भी नही पहुँच पाती, दोनों में थोड़ी नोक झोंक हुई, जो हर रोज़ का था.

आज सुबह जब ७:३० बजे ये लोग प्रार्थना करने के लिए सभा गृह में मिले थे, तब इन्होंने साथ मिलकर हाथ जोड़कर ये प्रार्थना की थी, “भारत हमारा देश है, हम सब भारतवासी भाई बहन हैं” , फिर भाइयों के बीच तो छोटी मोटी नोक झोंक होती रहती है. लंच ब्रेक में सारे दोस्त मिलकर घेरा बनाकर, लंच किया करते थे, स्कूल छूटने पर सब साथ साइकिल पर घर को निकलते थे, पर आज से सब बदलने वाला था, आज के बाद ये शायद अब ये फिर कभी ऐसे नही मिलने वाले थे.

जब ये सब यहाँ प्राथना कर रहे थे, तब ठीक उसी समय अवधि में गोधरा स्टेशन पर, साबरमती एक्सप्रेस आकर रुकी, उसमे आज एक अलग ही भीड़ थी, सब में एक अलग उत्साह था. कारसेवक आज अयोध्या से अपने आराध्य  श्री राम के दर्शन करके लौट रहे थे, सब को ये उम्मीद थी की अब जल्द से जल्द मंदिर बन जायेगा. राम मंदिर मुद्दा देश के कानून में शायद सबसे लम्बे समय से फंसे कुछ मामलों में से एक है.

क्या है मुद्दा –

२३ अप्रैल १९८५, शाह बानो केस , सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से निर्णय में अपील को खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय के फैसले की पुष्टि करते हुए शाह बानो के हक में जजमेंट देते हुए मोहम्मद खान को गुजारा भत्ता देने के लिए कहा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरजोर विरोध किया. शाहबानो के कानूनी तलाक भत्ते पर देशभर में राजनीतिक बवाल मच गया. राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को मिलने वाले मुआवजे को निरस्त करते हुए एक साल के भीतर मुस्लिम महिला (तलाक में संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, (1986) पारित कर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को पलट दिया.

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के ख़िलाफ़ जाकर, मुस्लिम धर्मगुरुओं को राजीव गाँधी ने ख़ुश कर दिया था, पर विपक्ष और देश की ज्यादातर जनता उनके इस फैसले से खुश नही थी.

अरुण नेहरु के सुझाव पर राजीव गाँधी ने १ फ़रवरी १९८६ को बाबरी मस्जिद के दरवाज़े खुलवा दिए, इस फैसले के बाद, सभी हिंदुओं को, जो इसे राम का जन्मस्थान मानते थे, वहां तक जाने की अनुमति मिल गयी और मस्जिद को एक हिंदू मंदिर के रूप में कुछ अधिकार मिल गया.

१५२८ में बाबर के सिपहसालार मीर बाक़ी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था. १७६६ – १७७१ के दौरान यूरोपीय मिशनरी जोसेफ टिफेन्थलर ने इस साईट के दौरे किये थे, इनके काम को १७८८ में  जोहान बर्नोली ने अनुवाद किया उस के अनुसार, औरंगजेब या बाबुर ने रामकोट किले को तोड़ दिया था, जिसमें हिंदू द्वारा राम का जन्मस्थान माना जाता है और उसकी जगह एक मस्जिद का निर्माण किया गया. ६ दिसंबर १९९२, बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया.

२७ फ़रवरी २००२ गोधरा, साबरमती ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी थी, अभी स्टेशन से कुछ दूर निकली थी की पास की मस्जिद के लाउड स्पीकर से शोर हुआ, और १००० से २००० की भीड़ ने ट्रेन पर पत्थर बाज़ी करनी शुरू कर दी, ट्रेन के अन्दर पेट्रोल में भीगे हुए लत्ते फेंके गए, चार रेल के डिब्बों को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमे ५९ लोग जलकर राख़ हो गए. मरने वालों में २७ औरतें और १० बच्चे भी थे.

२८ फ़रवरी २००२, शहर भर में दंगे भड़क गए,गोधरा, अहमदाबाद गुजरात के लगभग सभी बड़े शहरों में दंगे का असर था. लगभग २००० लोगो का कत्ले आम हुआ, ज्यादा संख्या मुसलमानों की थी पर हिन्दू के भी कम नही मरे थे. दोनों तरफ का भारी नुकसान हुआ था.

२८ फ़रवरी २००२ , अमन घर से पूजा के लिए सुबह ६ बजे के लगभग फूल लेने निकला, जब वो फूल लेकर आ रहा था, तब उसने देखा की एक आदमी सड़क पे भागे जा रहा है उसके पीछे एक आदमी तलवार लेके दौड़ रहा है. चार रास्ते पे पहुँच के तलवार वाले आदमी ने उस आदमी के ऊपर तलवार का वार कर दिया, जिससे उस आदमी की वहीँ मौत हो गयी. १३ वर्ष का अमन जिसने ये दृश्य देखा सहम गया, घर आकर वो चुपचाप सो गया.

अगले दिन उसे पता लगा, स्कूल में वो जिस अब्दुल के साथ फुटबॉल खेलता है, जो उसकी टीम का कप्तान भी है, वो एक मुसलमान है. कक्षा ७ में पढ़ रहे अमन को स्कूल में कभी किसी ने नही बताया था कि मुसलमान भी कोई अलग धर्म हैं, वहां वो सबके साथ खेलता था, सभी तो अच्छे हैं, पर सब कह रहे हैं की मुसलमान बड़ा ख़राब होता है. स्कूल में तो सब कहते हैं अब्दुल की मम्मी आमलेट बहुत अच्छा बनाती हैं, अब्दुल भी फुटबॉल अच्छा खेलता है, मेरा दोस्त है, मुझे तो वो ख़राब नही लगता.

एक हफ्ते बाद स्कूल फिर से खुले, पर स्कूल में अब्दुल और मोईन नही थे, दोनों ने स्कूल छोड़ दी थी, और अपने ही नज़दीक की बस्ती में एक स्कूल में पढने लगे थे. अब जब फुटबॉल का मैच होता, तो अब्दुल की कमी खलती थी. दूसरी टीम को भी मोईन की कमी खलती थी, पर वे दोनों अब हमारे साथ फुटबॉल खेलने नही आने वाले थे. अमन को इन सब में एक बात समझ आ रही थी कि धर्म होता है, और उसके नाम पे दंगे होते हैं, जिसमे दोस्त बिछड़ जातें हैं, और दुश्मन बन जाते हैं. आज से पहले उसके लिए धर्म का कोई मतलब नही था, आज से वो धर्म को जानने की कोशिश करने लगा है.

धर्म के नाम पे दंगे होते हैं, बहुत सी जाने चली जाती हैं, बहुत से दोस्त बिछड़ जाते हैं, बहुत से दुश्मन हो जाते हैं, पर मिलता कुछ नही, सब सुने रह जाते हैं.

अयोध्या मुद्दा आज भी अटका पड़ा है, सर्वोच्च न्यायालय में पक्ष – प्रतिपक्ष आज भी अपनी अपनी दलीलें पेस कर रहे हैं. राम मंदिर बनेगा ये सुनिश्चित हो गया है, कब बनेगा ये अभी सुनिश्चित नही हुआ.

 

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s